SRI LANKA BLASTS: Islamic State claims Responsibility: इस्लामिक आतंकियों की जगह बौद्धों पर अंगुली उठा रहे थे वामपंथी दल और कुछ अखबार

– रविवार को श्रीलंका में हुए हमले में अब तक 321 की मौत

– भारत के कुछ अखबार और वामपंथी बौद्ध धर्मियों पर उठा रहे थे सवाल

रवि रौणखर, जालंधर
23 अप्रैल, 2019

रविवार को श्रीलंका में हुए आत्मघाती हमले में अब तक 321 की जान जा चुकी है। 21 अप्रैल शाम को ही कुछ मुस्लिम युवकों को सुरक्षा एजेंसियों ने गिरफ्तार कर लिया था। इसके बावजूद भारत के वामपंथी दल खासकर कम्यूनिस्ट पार्टी के आला लीडर और कुछ अखबार यह कहने में जुटे थे कि इसमें बौद्ध संगठनों का हाथ हो सकता है। जबकि पूरी दुनिया की खुफिया एजेंसियां इस ओर इशारा कर रही थीं कि यह इस्लाम के नाम पर आतंक फैलाने वालों का काम है। 21 अप्रैल को हमले की शाम को ही कुछ मुस्लिम युवकों के नाम भी सामने आ गए थे। भारत की खुफिया एजेंसियां भी तो बता चुकी थीं कि श्री लंका पर आतंकी हमला हो सकता है। इस्लामी आतंकवादियों की ऐसी तैयारी की खबरें आ रही थीं। जनवरी 2019 में भी श्रीलंका में इस्लामिक स्टेट (आईएस) से जुड़े कुछ आतंकी पकड़े गए थे। सैकंड़ों किग्रा. विस्फोटक सामग्री भी जब्त हुई थी। मगर ऐसा क्या है कि वामपंथी दल और तथाकथित बुद्धिजीवी इस्लामिक आतंकवादियों का हमेशा बचाव करते हैं। देश के प्रतिष्ठित समाचार पत्र दैनिक भास्कर ने भी अपने फ्रंट पेज पर लिखा था कि बौद्ध संगठन पर भी शक, जबकि अखबार रात को छपती है और तबतक तो तस्वीर काफी साफ हो चुकी थी कि इसमें इस्लामिक संगठनों का ही हाथ है और यह न्यूजीलैंड की क्राइस्टचर्च मस्जिद हमले का बदला है। मगर फिर भी बौद्ध धर्म का नाम जबरदस्ती घसीटा गया।

आतंक को जबरदस्ती अल्पसंख्यक मुद्दे से जोड़ा गया

श्री लंका की सेंट सेबस्टियन चर्च में विस्फोटकों से भरा बैग ले जाता इस्लामिक आतंकी

ऐसी ही एक वामपंथी लीडर कविता कृष्णन ने 21 अप्रैल को हमले वाली दोपहर को ही ट्वीट कर अपना फैसला सुना दिया था कि यह श्रीलंका के अल्पसंख्यकों पर हमला है। इसमें बौद्ध बहुसंख्यकों का हाथ है या नहीं लेकिन यह अल्पसंख्यकों पर हमला है। जबकि यह अल्पसंख्यकों पर किया हुआ हमला नहीं बल्कि ईसाइयों पर इस्लाम का हमला था। इस्लाम और ईसायीत या फिर कहें कि इस्लाम हमेशा से बाकी धर्मों के साथ टकराव की स्थिति में रहा है। मानव इतिहास को खंगाल कर देखें तो हर शताब्दी में खूनी खेल खेला गया है। इसमें ईसाई और इस्लाम को मानने वाले देश सबसे आगे रहे हैं। इस हमले को सीधे सीधे न्यूजीलैंड की मस्जिद में हुए आतंकी हमले का बदला बताया जा रहा है।

नीचे पढ़िए कि कविता कृष्णन ने क्या कहा था

कविता कृष्णन और वामपंथियों को कैनेडियन लेखक तारेक फतेह ने जवाब दिया

सीपीआई (एम) ने कहा अल्पसंख्यकों पर हमला,
लेकिन यह कभी नहीं कहा कि इस्लाम के नाम पर आतंक है!

सीपीआई ने भी एक नोट जारी करते हुए कहा कि एशिया के देशों में अल्पसंख्यकों पर हमले हो रहे हैं। हालांकि सीपीआईएम के प्रकाश करात या सीताराम येचुरी में से किसी ने भी यह नहीं कहा कि यह इस्लामी जिका काम है न कि शांतिप्रिय बौद्धों का। असल में बौद्ध धर्म शांति और अहिंसा का संदेश देता है। ऐसे में इस्लाम के नाम पर आतंक फैलाने वालों को बचाकर कम्यूनिस्ट विचारधारा के नेता एक बार फिर से बेनकाब हो गए हैं। सीपीआई द्वारा जारी संदेश में आप पढ़ सकते हैं कि उसमें अल्पसंख्यकों की बात हुई है। एक ऐसा संदेश देने की कोशिश हुई है जिसमें यह लगे कि श्रीलंका के अल्पसंख्यकों पर अत्याचार हो रहे हैं जबकि यह हमला मुस्लिम संगठन ने किया जो कि श्रीलंका में खुद अल्पसंख्यक समुदाय है। यानी एक अल्पसंख्यक समुदाय ने दूसरे अल्पसंख्यक समुदाय को मारा। इसमें कहीं भी अल्पसंख्यक एंगल था ही नहीं लेकिन वामपंथी नेताओं ने इस्लाम के नाम पर आतंक को भी अल्पसंख्यक का रूप दे दिया।

आईएस ने ली जिम्मेदारी

इस्लामिक स्टेट ने श्रीलंका हमले की जिम्मेदारी ली है

श्रीलंका में इस्लामिक आतंकी हमले में अब तक 321 लोग मारे जा चुके हैं। कुल 8 बम धमाके हुए थे। तीन चर्च, तीन होटल और दो अन्य जगहों पर धमाकों में 500 से ज्यादा घायल भी हो चुके हैं। हमला जब किया गया तब चर्चों में लोग ईस्टर की पूजा कर रहे थे। हमले के 48 घंटे बाद इस्लामी कट्टरपंथी और आतंकी ग्रुप आईएस (इस्लामिक स्टेट) ने इसकी जिम्मेदारी ली। इस्लामिक स्टेट की न्यूज एजेंसी अमाक न्यूज एजेंसी ( AMAQ NEWS AGENCY ) ने एक प्रेस नोट जारी करते हुए स्वीकार किया कि उन्होंने ही यह हमला कराया है।

भारत भूमि ने रविवार को ही बता दिया था कि इसमें इस्लामिक आतंकी संगठनों का हाथ हो सकता है

7 मुस्लिम संदिग्ध तो रविवार दोपहर बाद ही पकड़ लिए गए थे