बकरीद पर 8 लाख में बिक रहा है सलमान

– पिछले साल जब बकरी बेचने आए अशरफ की बकरी को किसी ने कुत्ता बना दिया

12 अगस्त को बकरीद है। मुसलमान समुदाय इस पर्व पर जानवरों की कुर्बानी देता हैं। हर साल मंडियों में जानवरों की खरीद फरोख्त बड़े पैमाने पर होती है। इस साल गोरखपुर में एक बकरा खासा चर्चा का विषय बना हुआ है। आम तौर पर 10 हजार से 40 हजार रुपए तक बकरे की कीमत लगाई जाती है मगर इस बकरे की कीमत सुनकर हैरानी हो रही है। बकरे का नाम सलमान है और उसकी कीमत 8 लाख रुपए है।

निजामुद्दीन

बकरे के मालिक मोहम्मद निजामुद्दीन ने बताया कि बकरे के जन्म से ही उसके शरीर पर अल्लाह शब्द लिखा हुआ था। सफेद रंग के सलमान के शरीर पर काले बालों के धब्बे भी हैं। इनमें उर्दू में अल्लाह शब्द साफ पढ़ा जा सकता है। निजामुद्दीन ने बताया कि हम रोजाना सलमान पर 800 रुपए खर्च करते हैं।

बिकने के लिए तैयार सलमान (फोटो, कंटेंट साभारः एएनआई)

तभी तो इसका वजन 95 किलो है। निजामुद्दीन ने बताया कि जितना खर्च हम सलमान पर करते हैं उतना तो खुद अपने परिवार पर नहीं करते। यही हमारी कमाई है।

जब किसी ने बकरी को कुत्ता बना दिया दियाः

अशरफ ने बिकने से पहले अपनी बकरियों की फोटो खींच ली थी। (फोटो साभारः इंडिया टुडे)

यह कहानी पिछले साल कानपुर के जजमुआ चुंगी मंडी की है। अशरफ तीन बकरियों को नहला धुला कर मंडी बेचने के लिए लाया था। रात हो गई दो बकरियां बिक गईं। एक बच गई। तभी एक व्यक्ति ने कहा कि तुम्हारी बकरी भागकर वापस आ गई है। यह सुनकर अशरफ बताए गए मंडी के ही दूसरे कोने की भागा और वहां रस्सी से बंधी बकरी को खींचने लगा। बकरी के गले में फूल और शरीर पर कपड़े थे। अंधेरे में पता करना मुश्किल था कि वह अशरफ की ही बकरी थी। जैसे ही वह बकरी को खींचकर अपने अड्डे की ओर चलने लगा तो बकरी अजीब सी आवाजें निकालने लगी। उसने गौर से देखा तो वह तो कुत्ता था। कुत्ता भौंक रहा था। वह भागकर अपने अड्डे पर वापस आया तो देखा तीसरी बकरी गायब थी। किसी ने उसके साथ शरारत करके बकरी चुरा ली थी। अशरफ ने मंडी वालों से शिकायत की लेकिन सभी का हंस हंस कर बुरा हाल था। अशरफ ने परेशान होकर पुलिस से भी शिकायत नहीं की।

सदियों पुराना है बकरीद का त्यौहार

ईद पर जानवरों की कुर्बानी देना सदियों पुराना रिवाज है। बलि चढ़ने वाले जानवरों में सबसे बड़ी गिनती भेड़ और बकरियों की होती है। बकरों की बलि के चलते ही इसे बकरीद भी कहा जाता है। इस्लाम के इस पवित्र त्यौहार का सीधा संबंध हजरत इब्राहिम से जुड़ा है। अल्लाह ने स्वपन में आकर इब्राहिम से कहा कि तुम मेरी इबादत में अपनी सबसे प्यारी चीज की कुर्बानी दो। इब्राहिम अपने बेटे को सबसे ज्यादा प्यार करते थे। वह उसकी जैसे ही कुर्बानी देने लगे तो अल्लाह ने वहां दुंबे (भेड़) को रख दिया। तब से दुंबे की कुर्बानी दी जाती है। धीरे धीरे बाकी जानवरों की भी कुर्बानी दी जाने लगी। जिनमें भैंस, गाय, ऊंट, बकरियां शामिल हैं। हर साल पशु मंडियों में खरीददारों की खासी भीड़ देखी जाती है। लोग जानवरों को ले जाते हैं और उसकी बलि देते हैं। बलि देने के बाद मांस को पकाया जाता है और मिल बांट कर उसे खाया जाता है।

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