अब देश में दो ही जातियां बचेंगी- मोदी

– दो से दोबारा आने तक कई उतार चढ़ाव आए- मोदी

– आपने इस फकीर की झोली तो भर दी

  • प्रधानमंत्री मोदी ने प्रचंड जीत मिलने के बाद देश और भाजपा कार्यकर्ताओं को संबोधित किया, नीचे पढ़ें।

रवि रौणखर, जालंधर
23 मई, 2019

अब देश में दो जातियां ही बचेंगी। पहली जातिः गरीब, दूसरी जातिः गरीबी से मुक्त कराने के लिए योगदान देने वालों की। इस चुनाव ने जातिवाद के नाम पर जहर फैलाने वालों को जवाब दे दिया है। 1942 से 1947 तक देश का जो भी व्यक्ति कुछ भी करता था वह आजादी के लिए लड़ता था। सफाई, खादी, पढ़ाई, जनआंदोलन हर चीज वह आजादी के लिए करता था। 2019 से 2024 के बीच का पांच साल का कालखंड देश के लिए लड़ने वालों को याद करने वालों का है। तब हमने दुनिया की सबसे बड़ी ताकत को परास्त किया था। आज तो हम 130 करोड़ हैं। हमारे पास उस वक्त कुछ नहीं था लेकिन आज हम ताकतवर हैं। हमें अगले पांच साल उसी स्पिरिट के साथ काम करना है जिस स्पिरिट के साथ आजादी के लिए हमारे स्वतंत्रता सेनानी लड़े थे। प्रधानमंत्री मोदी दिल्ली स्थित बीजेपी हेड क्वार्टर्स में कार्यकर्ताओं को संबोधित कर रहे थे। मोदी ने अपने भाषण में विपक्षी दलों को भी साथ चल देश की तरक्की के लिए काम करने का न्यौता दिया।

अगले 5 साल आजादी के लिए 1947 से पहले वाले जोश को देश के विकास के लिए लगाएं

जो जोश 1947 से पहले आजादी के लिए था वह आज देश को ऊंचाइयों के लिए लग जाए तो हमें महाशक्ति बनने से कोई नहीं रोक सकता। इस चुनाव को हमें नम्रता से स्वीकारना है। सरकार तो बहुमत से बनती है, जनता ने बना भी दी है। लेकिन, लोकतंत्र के संस्कार। स्पिरिट। भारत के संविधान का स्पिरिट। हमें इस बात की जनाकारी देता है कि देश सर्वमत से चलता है। इसलिए मैं सार्वजनिक मंच से कहता हूं कि हमें आगे देखना है। हमें सबको साथ लेकर चलना है। हमारे घोर विरोधी होंगे उन्हें भी साथ लेकर चलना है। देशहित के लिए चलना है। इतना प्रचंड बहुमत होने के बाद भी नम्र होकर चलना है। संविधान ही हमारा सुप्रीम है। उसी की छाया में। उसी के हर शब्द के भाव को पकड़ते हुए शान से चलना है। भारत का हर नागरिक हमसे जुड़ेगा।

मुझ फकीर की झोली भर दी, मुझे तीन कसौटियों पर जरूर परखना

भाइयो और बहनों देश ने हमें बहुत कुछ दिया है। मैं देश वासियों से कुछ कहना चाहता हूं। मैं देशवासियों को विश्वास दिलाना चाहता हूं कि आपने इस फकीर की झोली तो भर दी। बड़ी आशाओं के साथ भरी है। आपकी आकांक्षाएं इससे जुड़ी हैं। मैं समझता हूं। आप 2014 में मुझे ज्यादा जानते नहीं थे। आपने मुझ पर भरोसा दिखाया। 2019 में मुझे जानने के बाद मुझमें और ताकत भर दी। मैं इसके पीछे की भावना को भली भांति समझता हूं। मैं भलि भांति समझता हूं। जैसे अमित भाई कह रहे थे बहुत वर्षों के बाद एक चुनी हुई सरकार। दूसरी बार पूर्ण बहुमत की सरकार। अब और भी ताकत से चुनकर आए। देश का भरोसा बढ़ा है। भरोसा जितना ज्यादा बढ़ता है जिम्मेदारी उतनी ज्यादा बढ़ती है। इसलिए मैं कहना चाहता हूं कि एनडीए और भाजपा ने बहुत मेहनत की है। मैं आपसे जरूर कहूंगा। आपने मुझे फिर से जो काम दिया है, आने वाले दिनों में मैं बद इरादे से, बद नीयत से कोई काम नहीं करुंगा। काम करते करते गलती हो सकती है लेकिन बद इरादे से, बद नीयत से मैं कोई काम नहीं करूंगा।
दूसराः देश वासियों आपने मुझे इतना बड़ा भरोसा, इतनी बड़ी जिम्मेदारी दी है, मैं फिर से कहूंगा, मैं, मेरे लिए कुछ नहीं करुंगा।
तीसरी बातः मैं सार्वजनिक रूप से कहूंगा। मेरे समय का पल पल, मेरे शरीर का कण कण, सिर्फ और सिर्फ देश वासियों के लिए है।

मेरे देश वासियो, आप इतना मुल्यांकन करें। इन तीन तराजुओं पर मुझे तोलते रहना। कभी कोई कमी रह जाए तो मुझे कोसते रहना। लेकिन मैं देश वासियों को विश्वास दिलाता हूं। मैं आज राष्ट्रीय अध्यक्ष और उनकी पूरी टीम राज्यों के अध्यक्ष, राज्यों की टीम, पन्ना प्रमुख से लेकर राष्ट्रीय प्रमुख तक, कार्यकर्ताओं को बहुत बहुत धन्यवाद करता हूं।

ऐसा चुनाव दुनिया में पहली बार हुआ है

देश आजाद हुआ और इतने लोकसभा के चुनाव हुए। मगर सबसे अधिक मतदान इस 2019 के चुनाव में हुआ है। वह भी 40-42डिग्री के बीच में। यह दुनिया में पहली बार हुआ है। यह अपने आप में भारत के मतदाता की जागरुकता, लोकतंत्र के प्रति भारत की प्रतिबद्धता पूरे विश्व को इस बात को रजिस्टर करना होगा। पूरे भविष्य को भारत की लोकतांत्रिक शक्ति को पहचानना होगा। इस अवसर पर मैं इस लोकतंत्र के उत्सव में। लोकतंत्र के खातिर जिन जिन लोगों ने बलिदान दिया है, जो लोग घायल हुए हैं, उनके परिवार जनों के प्रति अपनी संवेदना प्रकट करता हूं। और । लोकतंत्र के इतिहास में, लोकतंत्र के लिए मरना यह मिसाल आने वाली पीढ़ियों को प्रेरणा देती रहेगी। मैं चुनाव आयोग को, सुरक्षा बलों को, चुनाव की व्यवस्था को संभालने वाले हर किसी को उत्तम तरीके से लोकतंत्र में विश्वास बढ़ाने वाली व्यवस्था देने के लिए, दिल से बधाई देता हूं।

जनता ने श्रीकृष्ण की तरह इस चुनाव में हिस्सा लिया

साथियो जब महाभारत का युद्ध समाप्त हुआ। तब श्रीकृष्ण से पूछा गया कि आप किसके पक्ष में थे। मैं समझता हूं। उस समय महाभारत के काल में भगवान श्री कृष्ण ने जो जवाब दिया था वह आज 21वीं सदी में 2019 के चुनाव में, 130 करोड़ भारतीयों ने, श्री कृष्ण के रूप में जवाब दिया है। श्री कृष्ण ने जवाब दिया था कि मैं किसी के पक्ष में नहीं था। मैं तो सिर्फ हस्तिनापुर के लिए, हस्तिनापुर के पक्ष में खड़ा था। आज 130 लोग श्री कृष्ण के रूप में भारत के लिए खड़े थे। इसलिए देश के सामन्य नागरिक की भावना भारत के उज्जवल भविष्य की गारंटी है। इस चुनाव में मैं पहले दिन से कह रहा था कि चुनाव कोई दल नहीं लड़ रहा है, कोई उम्मीदवार या कोई नेता नहीं लड़ रहा है। यह चुनाव देश की जनता लड़ रही है। जिनके आंख और कान बंद थे, उनके लिए मेरी बात समझना मुश्किल था। लेकिन आज मेरी उस भावना को जनता जनार्दन ने प्रकट कर दिया है। इसलिए अगर कोई विजयी हुआ है तो हिंदुस्तान विजयी हुआ है, अगर कोई विजयी हुआ है तो लोकंतंत्र और जनता जनार्दन हुई है। इसलिए हम एनडीए के साथी नम्रता पूर्वक इस विजय को जनता जनार्दन के चरणों में समर्पित करते हैं। “

न रुके, न झुके, हम दो से दोबारा आ गए

भारतीय जनता पार्टी की विशेषता है। हम कभी क्रोधित होंगे मगर हम कभी अपने मार्ग से विचलित नहीं होंगे। न रुके, न थके, न झुके। कभी हम दो हो गए तो भी, आज दोबारा आ गए तो भी। दो से दोबारा आने पर इस यात्रा में कई उतार चढ़ाव आए। दो थे तो निराश नहीं हुए और दोबारा आए तो विनम्रता नहीं छोड़ेंगे। अपने आदर्शों को धूमिल नहीं होने देंगे।

मैं आज काफी व्यस्त था। चुनाव नतीजों पर ध्यान नहीं था। मुझे पूरी जानकारी नहीं है कि कहां क्या हुआ कैसे हुआ। लेकिन अध्यक्ष अमित शाह जी ने जो विस्तार से बताया यह अपने आप में हिंदुस्तान के पॉलीलिटकल पंडितों को अपनी सोच को छोड़ना होगा। यह 21वीं सदी का चुनाव है। यह मोदी की विजय नहीं है। यह देश में ईमानदारी के लिए तड़पते हुए नागरिक की आकांक्षाओं की विजय है, यह विजय आत्म सम्मान के लिए उस शौचालय के लिए तड़पती उस मां की है, यह उपचार से वंचित गरीब की विजय है, यह विजय देश के उन किसानों की है जो देश का पेट भरने के लिए खुद परेशान रहने वाले किसान की विजय है।

सेकुलर टैग धुल गया

इस चुनाव में एक भी चुनावी दल सेकुलरिजम का नकाब पहनकर चुनाव में नहीं आ पाया। हिंदुस्तान में कोई भी चुनाव ऐसा नहीं रहा जिसके केंद्र बिंदू में महंगाई न रही हो, यह चुनाव ऐसा है जिसमें महंगाई मुद्दा नहीं था, यह चुनाव ऐसा है जिसमें पांच साल रही सरकार पर एक भी भ्रष्टाचार का आरोप नहीं लगा पाया। यह मुद्दा नहीं बन पाया। राजनीतिक पंडितों को समझ में नहीं आ रहा था कि इस चुनाव को किस तराजू में तोला जाए। इस चुनाव ने 21वीं सदी के लिए देश की मजबूत नींव बनाई है। जो लोग देश का उज्जवल भविष्य चाहते हैं वे भारत के सुनहरी भविष्य, देश की एकता के लिए, देश के लोगों ने इस चुनाव में नया नैरेटिव दे दिया है। इस चुनाव में सामाजिकशास्त्र पंडितों को सोचने पर मजबूर कर दिया है।

इस देश में दो जातियां ही बचेंगी

अब देश में दो जातियां ही बचेंगी।
पहली जातिः गरीब
दूसरी जातिः गरीबी से मुक्त कराने के लिए योगदान देने वालों की
एक वो हैं जो गरीबी से बाहर आना चाहते हैं और एक वो हैं जो गरीबों को बाहर निकालना चाहते हैं। जो गरीबी से बाहर निकलना चाहता है उसे भी मजबूत करना है और जो देश के गरीबों को बाहर निकालना चाहता है उसे भी ताकतवर बनाना है।