2019 लोकसभा चुनावः भारत की राजनीति में परिवारवाद खात्मे की ओर

– लालू, शरद पवार, मुलायम, देवगौड़ा का कुनबा बुरी तरह चुनाव हारा, ज्योतिरादित्य सिंधिया भी हारे

– यूं तो जनता ने राहुल को भी हरा दिया था लेकिन वह वायनाड मुस्लिम बहुल सीट में अपनी लाज बचाने में कामयाब रहे

रवि रौणखर, जालंधर
24 मई, 2019

डॉक्टर का बेटा डॉक्टर या इंजीनियर का बेटा इंजीनियर या दुकानदार का बेटा दुकानदार अपनी मेहनत, लगन और कौशल से बनता है। मगर राजनीति कोई पेशा नहीं है। ऐसे में राजनेता का बेटा अगर नेता बने तो सवाल उठते हैं। ऐसा नहीं है कि वह राजनेता नहीं बन सकता लेकिन क्षमता, काबलियत और कौशल के बिना अगर व्यक्ति के सरनेम के चलते उसे देश पर राज करने का लाइसेंस मिलता है तो वह लोकतंत्र के लिए सही नहीं। पिछले दिनों आजतक की वरिष्ठ पत्रकार अंजना ओम कश्यप ने ट्विटर पर राहुल गांधी से सवाल पूछा था कि ‘अगर आप राजीव गांधी के बेटे न होते तो क्या आप इस वक्त कांग्रेस के अध्यक्ष पद पर होते? सवाल का उत्तर है – नहीं। राहुल गांधी काबिल नेता नहीं हैं। 2019 लोकसभा चुनाव में देश ने पहली बार परिवारवाद पर प्रहार किया है।

लालू के “होनहार” हारे

बिहार में लालू के तीनों बच्चे हार गए।

2019 का चुनाव लड़ रहे लालू प्रसाद यादव के सारे बच्चे चुनाव हार गए हैं। लालू की बेटी मीसा यादव और बेटे तेज प्रताप यादव व तेजस्वी यादव को जनता ने नकार दिया। तीनों बुरी तरह चुनाव हारे।

मुलायम का आधा कुनबा तो चुनाव हार गया

उत्तर प्रदेश में मुलायम के भतीजे तो हारे ही साथ में उनकी सांसद बहू डिंपल भी चुनाव हार गईं

यूपी में मुलायम सिंह और उनके बेटे अखिलेश यादव तो चुनाव जीत गए लेकिन उनकी बहू डिंपल यादव और भतीजे अक्षय और धर्मेंद्र चुनाव हार गए हैं।

पूनम महाजन से हारीं प्रिया दत्त

बाएं पूनम महाजन और दाएं प्रिया दत्त

मुंबई नॉर्थ सेंट्रल सीट पर सुनील दत्त की बेटी प्रिया दत्त का मुकाबला भाजपा के दिवंगत नेता प्रमोद महाजन की बेटी पूनम महाजन वजेंडला से था। इसमें प्रिया दत्त हार गईं।

पवार का पोता भी हारा

पार्थ पवार

महाराष्ट्र के दिग्गज नेता शरद पवार का पोता पार्थ पवार भी जीत का स्वाद चख न पाया। उन्हें शिवसेना उम्मीदवार ने मावल लोकसभा सीट पर बड़े मार्जिन से हरा दिया।

पूर्व प्रधानमंत्री और उनका पोता दोनों हार गए

एचडी देवगौड़ा और उनके पोते निखिल

पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवगौड़ा तो चुनाव हारे ही साथ ही उनके पोते निखिल कुमारस्वामी भी 1.25 लाख मार्जिन से हार गए। उसे भाजपा समर्थित एक आजाद उम्मीदवार ने कर्नाटक की मांडया सीट से हराया।

चौटाला परिवार का भी सूपड़ा साफ

दुष्यंत और दिग्विजय चौटाला

हरियाणा के कद्दावर नेता रहे ओम प्रकाश चौटाला के कुनबे का भी खाता नहीं खुल पाया है। 2019 के लोकसभा चुनाव में उनके दो पोते लोकसभा चुनाव लड़ रहे थे। दोनों हार गए।

सिंधिया भी अपनी सीट नहीं बचा पाए

ज्योतिरादित्य सिंधिया का चुनाव हारना कांग्रेस के लिए बड़ा झटका।
केपी यादव (सेल्फी लेते हुए मूंछों में) कभी कांग्रेस में थे। सिंधिया कार में हैं और वह उनके साथ सेल्फी ले रहे हैं। बाद में वे भाजपा में आ गए और सिंधिया को हरा दिया

कांग्रेस पार्टी के मध्यप्रदेश से बड़े नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया भी अपनी सीट नहीं बचा पाए। उन्हें भाजपा प्रत्याशि डॉ. केपी यादव ने 1 लाख से ज्यादा मतों से हराया। सिंधिया के पिता माधव राव सिंधिया कांग्रेस के कद्दावर नेता था। उनकी हैलिकॉप्टर हादसे में मौत हो गई थी। वे कांग्रेस में होते तो प्रधानमंत्री पद के दावेदार होते।

यूं तो जनता ने राहुल को भी नकार दिया

राहुल अगर मुस्लिम बहुल सीट पर न जाते तो शायद अमेठी में हारने के बाद संसद के बाहर ही रहते

2019 का लोकसभा चुनाव देश का पहला ऐसा चुनाव है जिसमें जाति वोटबैंक की तरह ज्यादा इस्तेमाल नहीं की जा सकी। साथ ही ज्यादातर नेताओं के बच्चे चुनाव हार गए। कुछ के जीत हासिल करने में कामयाब रहे हैं। जीतने वालों में ज्यादातर सत्ता पक्ष के हैं। मगर हार का स्वाद चखने वालों में राहुल गांधी भी हैं। राहुल गांधी की कांग्रेस पार्टी को पहले ही भनक लग गई थी कि वह अमेठी का चुनाव हार रहे हैं तभी तो उन्होंने केरल में एक सेफ सीट को चुना। केरल के वायनाड जिले में 50 प्रतिशत आबादी मुस्लमानों की है। राहुल गांधी ने वायनाड से चुनाव जीता और 4.31 लाख वोटों से जीते मगर वह अमेठी में स्मृति ईरानी से 55 हजार वोटों से हार गए।

सबसे बड़ी जीत

स्मृति ईरानी। राहुल को हराना इस चुनाव की सबसे बड़ी जीत है। 2014 में वह राहुल से लगभग एक लाख मतों से हार गई थीं। इस बार उन्हें 55000 वोटों से हराया।