विदेश का कातिल क्रेजः अमेरिका के एरिजोना मरुस्थल में मां पानी लेने गई थी, रास्ता भटकी, 7 साल की बेटी गुरप्रीत कौर की प्यास से मौत

– दो माताओं की कहानी जो बॉर्डर पार करते हुए अपनी अपनी बेटियों को पानी पिलाने के लिए भटकती रहीं

मैक्सिको बॉर्डर क्रास कर अमेरिका के एरिजोना के मरुस्थल में जब 7 साल की गुरप्रीत कौर अपनी आखिरी सांसे ले रही होगी तब उसे पंजाब के अपने गांव की याद तो आई होगी कि अगर उसका परिवार अमेरिका का सपना छोड़ वहीं पंजाब में रहता तो क्या वह यूं प्यासी मर सकती थी? गुरप्रीत ने जब प्राण त्यागे तब उसकी मां उसके लिए पानी लाने गई थी लेकिन वापस नहीं आ पाई। मरुस्थल में खो गई। पंजाब में पानी की कमी नहीं है। यहां के लोगों को ज्यादा देर प्यासा रहने की आदत भी नहीं है। ऐसे में जब 42 डिग्री की धूप में घंटों कंटीले कैकटस से भरे मरुस्थल में पैदल चलना पड़े तो 7 साल की मासूम की जान खतरे में पड़नी ही थी। हुआ भी वही। गुरप्रीत कौर गर्मी में प्यास के मारे दुनिया छोड़ गई। पांच नदियों के प्रदेश पंजाब की इस बेटी की ऐसी मौत की कल्पना भी किसी ने नहीं की होगी। अभी यह कन्फर्म नहीं हो पाया है कि वह पंजाब के कौन से जिले की रहने वाली थी।

 

किसने सोचा था कि पंजाब की बेटी भी प्यास से मर सकती है

पानी की बूंद को तरसते पंजाब की बेटी की मौत हैरान करने वाली घटना है

पांच नदियों की धरती कही जाने वाली पंजाब की धरती के लोगों को ऐसा क्या हो गया है कि वह हर कीमत पर इसे छोड़ विदेश भागने में जुटे हैं। हर साल अमेरिका में मैक्सिको के रास्ते अवैध तरीके से घुसने की कोशिश में दर्जनों भारतीय मारे जा रहे हैं। उनमें से बड़ी गिनती पंजाबियों की है। मगर 7 साल की बच्ची की प्यास से मौत अब तक की सबसे दर्दनाक खबर है। पानी की एक एक बूंद को तरसती यह पंजाब की बेटी इस सूबे की त्रास्दी को बयां करती है। बुधवार को उसकी लाश अमेरिका के ल्यूकविला शहर से 27 किमी दूर अमेरिका मेक्सिको बॉर्डर पर मिली। लाश बॉर्डर से 1.6 किमी दूर अमेरिकी का धरती पर पड़ी थी।

मां अपनी प्यासी बेटी के लिए पानी लेने गई थी लेकिन मरुस्थल में खुद भटक गई

एरिजोना के वीरान मरुस्थल में छायादार पेड़ मिलना भी मुश्किल है। रात को जहरीले बिच्छू और सांप यहां रुकना जानलेवा बना देते हैं।

गुरप्रीत कौर की मां को मैक्सिको बॉर्डर क्रास करवाने वाले एक गिरोह ने बॉर्डर के पास मंगलवार को छोड़ दिया था। उन्हें आदेश दिया गया था कि वह उत्तर दिशा की ओर बढ़ते रहें और वहां जाकर पुलिस के आगे आत्मसमर्पण कर दें। वकील उनका केस श्रर्णार्थियों के रूप में अमेरिकी सरकार के सामने पेश करेगा और फिर उन्हें अमेरिका से कोई बाहर नहीं निकाल सकता। यानी अमेरिका में बसने के लिए लोग यह तक कहने को तैयार हैं कि उन्हें पंजाब में खतरा है और उन्हें अमेरिका में शरण चाहिए। खैर वापस इस खबर पर आएं तो मैक्सिको के उस गिरोह ने जिन पांच लोगों को अमेरिका के एरिजोना स्टेट बॉर्डर पर छोड़ा था उनमें पांचों महिलाएं थीं। एक अकेली महिला और दो माताएं अपनी 7 और 8 साल की बेटियों के साथ। सात साल की लड़की का नाम गुरप्रीत कौर था। मैक्सिको के गिरोह के बताए रास्ते पर ये पांचों महिलाएं ल्यूकविला की ओर चल पड़ी थीं। गर्मियों में यहां तापमान 42 से 45 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाता है। पांचों मैक्सिको में भी बहुत दिनों तक भूख प्यास से लड़ चुकी थीं। मगर अमेरिकी धरती पर पहुंच उन्हें आशा थी कि उनके सारे दुख दूर हो जाएंगे मगर नियती को कुछ और ही मंजूर था।

गुरप्रीत कौर की मां पेड़ की छांव में बेटी को बिठाकर निकलती है

मैप में आप देख सकते हैं कि गुरप्रीत पहले मैक्सिको बॉर्डर पार कर अमेरिका के कई किमी अंदर चली गई थी। जब उसकी मां पानी लेने गई तो वह दूसरी महिला के साथ फिर से वापस बॉर्डर के पास आ पहुंची।

मंगलवार सुबह 7 बजे मैक्सिको का गिरोह उन्हें बॉर्डर पर छोड़ता है। 5-6 घंटे का सफर तय कर पांचों महिलाएं अमेरिका के रेगिस्तान में आगे बढ़ती हैं। 6 साल की गुरप्रीत का प्सास से बुरा हाल है। पूरे ग्रुप के पास पानी की एक बोतल भी नहीं थी। गुरप्रीत कौर की मां दूसरी महिला के साथ गुरप्रीत और दूसरी महिला व उसकी 8 साल की बेटी को पेड़ के नीचे बिठाकर खुद पानी की तालाश में निकल पड़ती हैं। गुरप्रीत की हालत बिगड़ रही थी। प्यास के मारे उसका बुरा हाल था। मां और दूसरी महिला एरिजोना के मरुस्थल में बहुत आगे निकल जाती हैं मगर उन्हें पानी नहीं मिलता। बॉर्डर से आखिरी गांव लगभग 27 किमी दूर था ऐसे में भटकते भटकते दोनों महिलाएं बहुत आगे निकल जाती हैं। वह बाद में वापस आने की कोशिश भी करती हैं लेकिन उन्हें वापसी का रास्ता भी नहीं मिलता। किसी तरह एक सड़क पर अमेरिका की बॉर्डर पैट्रोल की एक गाड़ी उन्हें दिखाई देती है। पुलिस अधिकारियों को गुरप्रीत की मां अपनी आप बीती सुनाती है कि मेरी बेटी बहुत प्यासी है और वह बॉर्डर के आसपास कहीं है मुझे वहां का रास्ता नहीं मिल रहा। रात भर पुलिस गुरप्रीत को ढूंढने की कोशिश में लगी रहती है। सुबह वह गुरप्रीत तक पहुंच पाते हैं। मगर तबतक बहुत देर हो चुकी होती है।

गुरप्रीत की लाश पड़ी थी लेकिन दूसरी महिला और उसकी 8 साल की बेटी गायबः

पुलिस को खुले में एक लड़की की बॉडी दिखाई देती है। मां दूर से अपनी बेटी को पहचान जाती है। गुरप्रीत कौर की मां को पुलिस पानी की बोतल देती है लेकिन जैसे ही मां गुरप्रीत को पानी पिलाने के लिए आगे बढ़ती है उसके शरीर पर चींटिया चल रही होती हैं। शरीर में कोई हरकत नहीं थी। आंखे खुली थीं। गुरप्रीत की मौत हो चुकी होती है। अमेरिकी पत्रकार राफेल करांजा के मुताबिक मां का रो रो कर बुरा हाल था। वह खुद को कोस रही थी कि भारत छोड़ अमेरिका क्यों आई। पिछले साल इसी एरिया में गैरकानूनी तरीके से बॉर्डर क्रास करते हुए 170 से ज्यादा लोगों की लाशें अमेरिकी बॉर्डर पैट्रोल को मिल चुकी हैं।

पोस्टमॉर्टम में मौत पानी की कमी के कारण हुईः

गुरप्रीत कौर की लाश को पास के पीमा कंट्री मेडिकल एग्जामिनर के पास ले जाया जाता है। पोस्टमॉर्टम के मुताबिक उसकी मौत हाइपरथर्मिया यानी तापमान के अधिक बढ़ जाने और पानी की कमी के कारण हुई थी।

दूसरी मां ने बेटी के साथ शुक्रवार को सरंडर कर दिया

एरिजोना मरुस्थल से गर्मियों में घुसपैठ की कोशिशें कम होती थीं लेकिन अब उनमें भी बढ़ौतरी हो गई है। अक्सर यहां अवैध तरीके से घुसने वालों की लाशें मिलती रहती हैं। गुरप्रीत के साथ भी ऐसा ही हुआ।

गुरप्रीत को मरुस्थल में अकेला छोड़ गायब हुई दूसरी भारतीय महिला ने अपनी 8 वर्षीय बेटी के साथ शुक्रवार को बॉर्डर पैट्रोल के सामने आत्मसमर्पण कर दिया। महिला ने बताया कि गुरप्रीत कौर की मां का इंतजार घंटो किया। मगर जब वह नहीं आई तो हम वापस उसी रास्ते की ओर चल पड़े जहां से आए थे। मैक्सिको बॉर्डर के ठीक पहले गुरप्रीत की हालत ज्यादा खराब हो गई और वह बेहोश हो गई। रात हो चुकी थी। मुझे भी दूर दूर तक कुछ दिखाई नहीं दे रहा था। मुझे अपनी बेटी की जान की फिक्र हो रही थी। उसे भी बहुत तेज प्यास लगी थी। गुरप्रीत ने थोड़ी देर बाद हरकत बंद कर दी। मैं समझ गई थी कि उसकी जान जा चुकी है। मैं अपनी बेटी को बचाने के लिए पानी की तालाश के लिए निकल पड़ी। अमेरिकी पत्रकार राफेल करांजा के मुताबिक दूसरी महिला ने बॉर्डर पैट्रोल के अधिकारियों को बताया कि गुरप्रीत की मौत के बाद मैं डर गई थी। अपनी बेटी को बचाने के लिए पहले  मैक्सिको में दाखिल हुई। वहां पानी नहीं मिला तो फिर से अमेरिकी बॉर्डर लांघ चैकपोस्ट की ओर चल पड़ी। चैकपोस्ट पर सरंडर करने के बाद हमें पानी मिला।

हम सीरिया वालों की तरह दूसरे देशों के बॉर्डर क्यों लांघ रहे हैं

सोशल मीडिया पर इस घटना की निंदा हो रही है। लोग कह रहे हैं कि आखिर पंजाब में ऐसा क्या है कि यहां के लोग सीरियाई शर्णार्थियों की तरह अमेरिका और यूरोप के देशों में घुस रहे हैं।