Dignity of Dastaar Prevailed: जब सर्बजीत की पगड़ी उसे काबू करने वाले पुलिस वाले के सिर पर सजी

– दिल्ली के मुखर्जी नगर में सर्बजीत सिंह और पुलिस के बीच मारपीट मामले में पगड़ी उछालने के मामले में नया मोड़
– मामला उछालने वालों को शायद पता नहीं था कि जमीन पर गिरी सर्बजीत की पगड़ी पुलिस वाले के सिर पर सजी
Ravi Raunkhar, Jalandhar
19 June, 2019

अक्सर हमें खबरें मिलती हैं कि सिख ने अपनी पगड़ी से किसी की जान बचाई। कभी किसी डूबते हुए को बचाया तो कभी खून से लथपथ के लहू को बहने से रोका। दिल्ली के मुखर्जी नगर मामले में भी सिख समुदाय के नेता इस बात से भी आक्रोश थे कि ऑटो चालक सर्बजीत सिंह की पगड़ी को जानबूझ कर गिराया गया। मगर राहगिरों ने जो वीडियो बनाए हैं उसमें एक नया एंगल सामने आ रहा है। सर्बजीत सिंह की जमीन पर गिरी दस्तार (पगड़ी) उसे काबू करने वाले एएसआई के सिर पर सज गई थी। जी हां। जिस पुलिस वाले को सर्बजीत ने अपनी कृपाण से घायल किया था उसे सिर पर बहते लहू को सर्बजीत कि दस्तार से ही रोका गया था। धर्म की राजनीति करने वालों को यह घटना एक पाठ पढ़ाती जान पड़ती है। मानो सिख धर्म की मर्यादा का सबसे बड़ा स्वरूप “दस्तार” आक्रोशित और बेकाबू पुलिस वालों और सिरफिरे सर्बजीत को शांति का पाठ पढ़ा रहा हो। दुनिया में सिख अपनी दस्तार से ही अलग दिखाई देते हैं। दस्तार बहादुरी, आत्म सम्मान के साथ साथ दया का भी संदेश देती है। इस मामले में सर्बजीत सिंह ने चाहे सिख धर्म की मर्यादाओं को कृपाण के गलत इस्तेमाल से तोड़ा है लेकिन झगड़े में उसकी दस्तार उसी को पीटने और काबू करने वालों के काम भी आई।

धर्म के ठेकेदारों को संदेश देती दस्तार

सर्बजीत को नीचे गिराकर उसे काबू करते एएसआई योगराज

दिल्ली के मुखर्जी नगर में जब ऑटो चालक सर्बजीत सिंह और पुलिस के बीच मारपीट और धर पकड़ चल रही थी तब सर्बजीत सिंह की पगड़ी जमीन पर गिर गई। बाद में कुछ नेताओं ने इसे मुद्दा भी बनाया कि उसकी दस्तार पर पुलिस वालों ने हाथ डाला। हालांकि लड़ाई में दस्तार गिरना आम बात है लेकिन इस मामले में दस्तार का मान खराब नहीं हुआ। दस्तार सर्बजीत सिंह के सिर से उतरी तो एक पुलिस वाले के सिर पर सज गई। सर्बजीत सिंह अपनी कृपाण को अंधाधुंध फहरा रहा था। वीडियो में आप सब ने देखा होगा कि उसे एक सफेद टी-शर्ट वाला पुलिस कर्मी काबू करने की कोशिश करता है। जब वह उसे पकड़ रहा होता है तब बाकी वर्दीधारी पुलिस वाले उसके करीब भी नहीं जाते। क्योंकि सर्बजीत सिंह के पास एक अच्छी खासी लंबाई वाली कृपाण थी जिसका एक वार जान ले सकता था। सर्बजीत सिंह और उसके बेटे से अकेले भिड़ने वाले पुलिस कर्मी का नाम योगराज शर्मा है। वह दिल्ली पुलिस में एएसआई है। एएसआई योगराज ही निहत्थे उससे भिड़ता है और सर्बजीत सिंह की कृपाण से घायल हो जाता है। उसके सिर, पेट और टांग पर घाव हैं। सिर पर थोड़ा ज्यादा गहरा कट लगने से खून बहने लगा। जब सर्बजीत को पुलिस ने काबू कर लिया और उसकी दस्तार जमीन पर गिरी थी तब लहू लुहान एएसआई उस दस्तार को उठाते हैं और अपने सिर पर लपेट लेते हैं। खून रोकने के लिए। लहू ज्यादा बह रहा होता है तो दो साथी पुलिस वाले केसरी दस्तार से एएसआई योगराज को वहां से अस्पताल ले जाते हैं।

यानी दस्तार का मान गिरा नहीं बल्कि और ऊंचा उठ गया

जमीन पर गिरी सर्बजीत की दस्तार उठाते लहू लुहान एएसआई योगराज
एएसआई योगराज के सिर पर सर्बजीत की दस्तार

मामले को धार्मिक रंग देने की कोशिशों को हालांकि पब्लिक ने नकार दिया है। पब्लिक ने इसे सिर्फ कानून और व्यवस्था का मामला ही माना है। वैसे 130 करोड़ के इस देश में एक मामला देश के अमन चैन को चोट नहीं पहुंचा सकता। कुछ धार्मिक कट्टरवादी इसे सिख विरोधी हिंसा का नाम दे रहे हैं। पंजाब के कई धार्मिक गुट भावनाओं को भड़काने का काम भी कर रहे हैं। मगर इस मामले में जहां पुलिस ने बाप बेटे की पिटाई की वहीं सर्बजीत सिंह ने भी कृपाण से पुलिस वाले को घायल किया और कानून को अपने हाथ में लिया। मामले को कानून और व्यवस्था के नजरिए से देखने की जरूरत है। एक निष्पक्ष जांच से सब साफ साफ हो जाए। मगर इस मामले में दस्तार का मान गिरा नहीं ऊंचा हुआ है।

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