खुलासाः बालाकोट में आतंकियों की लाशों को दफनाने की बजाय गाड़ियों से पैट्रोल निकाल जला दिया गया, कुछ की लाशें नदी में बहा दी गईं

  • बालाकोट से जुड़ा एक अॉडियो वायरल हो रहा है जिसमें एक शख्स उन लोगों के नाम बता रहा है जो उस हमले में मारे गए हैं
  • उसने खुलासा किया कि बालाकोट में मारे गए आतंकियों की लाशों को गाड़ियों से पैट्रोल निकाल निकाल कर जला दिया गया।
  • लाशों को जलाने का विरोध भी किया जैश ए मोहम्मद ने। उनका कहना था लाशें जलाने से आतंकियों को जन्नत नसीब नहीं होगी

रवि रौणखर, जालंधर
11 मार्च, 2019

बालाकोट हमले में मारे गए आतंकियों के शवों को या तो जला दिया गया था या उन्हें नदी में बहा दिया गया था। जो घायल थे उन्हें डॉक्टरी इलाज भी मुहैय्या नहीं कराया गया ताकि किसी को यह न पता चल जाए कि वहां घायल भी हैं। घायल दर्द से कराह रहे थे। दवा मांग रहे थे लेकिन पाकिस्तानी फौज के बेरहम अफसरों ने उनकी मदद नहीं की। हमले के एक चश्मदीद का एक ऑडियो क्लिप वायरल हो रहा है जो किसी से बातचीत में बता रहा है कि वहां हो क्या रहा है और अभी तक वहां किसी को भी जाने की इजाजत नहीं है। शवों को जलाने की खबर जब जैश ए मोहम्मद के बड़े कमांडरों को मिली तो उन्होंने पाकिस्तानी फौज से नाराजगी भी जताई। कमांडरों का कहना था कि जलाने से उनके फिदायीन को जन्नत नसीब नही होगी। वे भारतीय फौज के हमले में मारे गए थे। उन्हें दफना दिया जाता तो जन्नत में जाते। इससे एक बात साबित हो गई है कि आतंकवाद पर भारतीय वायुसेना का निशाना बिलकुल ठीक बैठा था। कितने मारे गए वह शायद पता न चल पाए लेकिन जिस वक्त बालाकोट पर हमला हुआ उस वक्त वहां 265 लोग मौजूद थे।

बालाकोट में जैश के ठिकाने का बोर्ड दिखाता एक बोर्ड

बालाकोट में इंटरनेट सेवाएं बंद रखी गई हैं। अभी तक पाकिस्तानी फौज उस इलाके को पूरी तरह से घेरे हुए है। मगर लोकल पब्लिक के पास बहुत सारे वीडियो और फोटो पहुंच चुकी हैं और वह उन्हें शेयर भी करने लग गए हैं। अब जल्द वहां की फोटो भी सोशल मीडिया के जरिए भारत तक पहुंचने वाली हैं।

265 लोगों में से 83 कुछ दिन पहले ही आतंक की ट्रेनिंग लेने आए थे जिनमें ज्यादातर किशोर थे

बालाकोट के जाबा टॉप पर जैश ए मोहम्मद के मदरसे तालीम उल कुरान में जब हमला हुआ उस वक्त 265 लोग मौजूद थे। उनमें जैश के सीनियर कमांडर, आईएसआई एजेंट, पाकिस्तान फौज के मौजूदा और पूर्व अफसर और हल्की उम्र के छात्र जिन्हें आतंक की ट्रेनिंग दी जानी थी मौजूद थे।

कौन कौन वहां मौजूद था, उनकी गिनती नीचे दी गई है

18 – सीनियर कमांडर (उनका काम आतंकियों को ट्रेन करना था)

83 – आतंकी दौरा ए आम के लिए जुटे थे। वे आतंकी कोर्स के फर्स्ट ईयर के आतंकी थी। बिलकुल नए। उन्हें एक दो दिन ही हुए थे वहां आए हुए। इनमें ज्यादातर किशोर थे।

91 – आतंकी दौरा ए खास के लिए जुटे थे। यह आतंकियों की एडवांस ट्रेनिंग होती है। इसमें आतंकियों को बन बनाने से लेकर बाकी ट्रेनिंग दी जाती है। वे इस ट्रेनिंग के बाद सीधे भारत की सीमा में दाखिल करवा दिए जाते थे।

25 – फिदायीन आतंकी वहां थे। इनकी ट्रेनिंग पूरी हो चुकी थी और जल्द इन्हें पुलवामा जैसे आतंकी हमले के लिए कश्मीर भेजा जाना था।

30 – आतंकी दौरा ए मौतुल्लाह के लिए जमा हुए थे। उनकी फिदायीन ट्रेनिंग भी पूरी हो चुकी थी।

18 लोग वहां रसोइए, नाई और बाकी स्टाफ के तौर पर मौजूद थे।

आतंकियों को कुरान की आयतों का हवाला देकर फिदायीन बनाने में वहां के टीचर्स (मौलाना) का बड़ा रोल रहता है। जानकारों के मुताबिक वहां मुफ्ति उमर, मौलाना कासिम, मौलाना असलाम, मौलाना अजमल, मौलाना जुबेर, मौलाना अब्दुल गफूर कश्मीरी, मौलाना कुदरतुल्ला, मौलाना कासिम और मौलाना जुनैद नाम के धार्मिक टीचर भी मौजूद थे जो मारे गए।

चश्मदीदों के मुताबिक हमले के बाद से वहां पाकिस्तान सेना अड्डा जमाए हुए है

14 फरवरी को पुलवामा हमले में सीआरपीएफ के 45 जवान वीरगति को प्राप्त हुए थे। भारत ने बदला लिया और 26 फरवरी को भारतीय लड़ाकू जहाजों ने पाकिस्तान के खैहबर पख्तूनख्वा प्रांत के बालाकोट स्थित जैश ए मोहम्मद के आतंकी ठिकानों को तबाह कर दिया था। उसमें कितने आतंकी मारे गए इसकी स्टीक गिनती किसी के पास नहीं है लेकिन अब इंटेलिजेंस इनपुट से वहां कम से कम 265 लोगों के होने का दावा किया जा रहा है। साथ ही धीरे धीरे वहां के लोकल लोग भी जानकारी शेयर करने लगे हैं। जानकार यह भी बताते हैं कि वहां के स्थानीय नागरिक पाकिस्तान के आतंकी शिविरों में रहने वाले आतंकियों से खासे तंग थे। आतंकी उस इलाके में अक्सर देखे जाते थे। आतंकी कैंप से 10-20 किमी के घेरे में आम लोगें को जाने की इजाजत नहीं थी। पाकिस्कान ने 26 फरवरी को ऐलान किया था कि वह इंटरनेशनल मीडिया को वहां ले जाना चाहता है लेकिन मौसम खराब है। मौसम विभाग के मुताबिक मौसम उस दिन साफ था और उसके अगले दिन धूप खिली थी। उस इलाके में बारिश होती ही रहती है लेकिन दो हफ्ते बाद भी पाकिस्तान ने अब तक वहां इंटरनेशनल मीडिया को जाने की मंजूरी नहीं दी है। अंतर्राष्ट्रीय न्यूज एजेंसी रायटर्स ने पहले कहा था कि वहां किसी तरह की डैमेज नहीं हुई है लेकिन जब एजेंसी से सवाल पूछा गया कि क्या आपको वहां जाने की इजाजत मिली थी तो एजेंसी ने अगली खबर छापते हुए कहा कि नहीं। हमें वहां जाने की इजाजत नहीं मिली। रिपोर्ट में छापा है कि वहां मीडिया को न जाने की इजाजत के चलते शक पैदा हो रहा है कि असल में वहां मौजूद लोगों का हुआ क्या।

पढ़िए क्या कह रहा है एक चश्मदीदः

“ये हिंदुस्तानी जंगी जहाजों ने जो बालाकोट पर हमला किया है मैं तकरीबन सबको जानता हूं इनका ज्यादातर ताल्लुक जैश-ए-मोहम्मद से है इसमें जो ज्यादातर मारे गए हैं जैश-ए-मोहम्मद से हैं अब मैं कुछ नाम तुम्हारे साथ शेयर कर रहा हूं इनको जरा अपने माइंड में रखना अब्दुर रज्जाक है एक लाहौर के मेजर कराची का अल्ताफ अली चौधरी है रावलपिंडी का मदस्सर अली बहावलपुर के उस्ताद मोहसिन, बन्नू के दो भाई, अली खटक, बहादुर खटक ये दोनों मारे गए हैं गुजरावालां का था एक उसी तंजीम का था वो बड़ा मेजर बंदा उन्होंने मारा है जैश-ए-मोहम्मद से उसका ताल्लुक था 

सॉफ्टवेयर का एक्सपर्ट राणा मोहसुन अली, मियांवली के तौफीक उमर, मोईन अली, सरदार सुहेल, डेरा गाजी खान के कैप्टन रिटायर्ड मुश्ताक, मंडी बावलदीन के शैरयारदीन 
मॉडल टाउन कराची के वीडियो एडिटिंग स्पेशलिस्ट अली शेख नाम है उसका 
डेरा इस्माइल खान के आईडी एक्सपर्ट इंजीनियर राणा, ये कुछ नाम है जो मेरे इल्म में थे 
मैं इनकी पूरी इत्तला दे रहा हूं ये कन्फर्म नहीं है कि इनकी तादाद कितनी है समझ गए हो ?

इस फौज ने दिन रात बालाकोट को घेरे में लिया हुआ है लोगों को मार रहे हैं मोबाइल इनसे छीने जा रहे हैं 
इन्होंने इलाके में इंटरनेट भी बंद कर दिया है ताकि वीडियो, फोटो लोग न फैला सके, लेकिन ये मौके का मंजर था बड़ा दर्दनाक था 
क्योंकि जख्मी लोगों को ये मेडिकल सुविधाएं भी नहीं दे रहे थे और जो जख्मी थे यकीन मानिए वो चीख-चीखकर इनसे मदद मांग रहे थे 
लेकिन ये फौजी थे यकीन मानिए इतने बेरहम और जालिम थे इन्होंने डॉक्टर तक वहां नहीं जाने दिया है 

तकरीबन ज्यादातर तादाद में इन्होंने लाशें जलाई भी हैं गाड़ियों से पेट्रोल निकाला है जो पेट्रोल इनके पास था लाशों को जलाया भी है 
और जो बच गए थे एक नदी है कुनहार उसमें उन्हें फेंक दिया, ताकि कोई भी सुराग न मिल सके, लेकिन इतना रफा-दफा करने के बावजूद भी लोगों के पास वीडियो व्हाट्सअप पर मौजूद है वे एक – दूसरे को भेज भी रहे हैं ऐसा मुझे लग रहा है हिंदुस्तानी हमले से जैश-ए-मोहम्मद और आईएसआई में जबरदस्त खौफ है और अब इन्होंने सभी लड़के वजीरिस्तान अफगानिस्तान बॉर्डर के इलाके में भेज दिए हैं। समझ गए हो न। जबसे ये सारा कुछ हुआ है इन्होंने सारे लड़के शिफ्ट कर दिए हैं  वजीरिस्तान अफगानिस्तान बॉर्डर के इलाके में भेज दिए हैं

अगर अगला हमला हिंदुस्तानी जंगी जहाज पाकिस्तानी आर्मी कैंप पर करते हैं उनको मुंह छिपाने की जगह नहीं मिलेगी। अब हमें उम्मीद है कि हिंदुस्तानी फौजें जो हमला कर रही हैं और दहशतगर्दों को मार रही हैं। हमेशा-हमेशा के लिए हमें इनसे निजात मिल जाएगी।”

नीचे ऑडियो में सुनिए की चश्मदीद क्या कह रहा है